और वो भी तुम (ग़ज़ल संग्रह)
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Book Title:
और वो भी तुम (ग़ज़ल संग्रह) -
Author:
महेश कुमार कुलदीप -
Language:
Hindi
Book Description
जब भी दिल ख़ुश होता है, भारी होता है या कोई बात अंदर तक उतर जाती है, तो मैं उसे क़लम के हवाले कर देता हूँ। अक्सर लगता है जैसे लफ़्ज़ मेरे नहीं, मेरे जज़्बात खुद-ब-खुद अल्फ़ाज़ ग़ज़ल बनकर क़ाग़ज़ पर उतरते जाते हैं। मेरे दिल की बात और के दिल की बात बन जाती है। ग़ज़लें कुछ ऐसी ही होती हैं। वे हमारी रूह के सबसे कोमल और सबसे सच्चे कोनों को छूती हैं। यह संग्रह उन्हीं लम्हों की ख़ामोश गवाही है- कभी इश्क़ की नर्माहट-गर्माहट, कभी जुदाई की कसक, कभी वस्ल की ग़मक, कभी ज़िंदगी की उलझनों में फँसी उम्मीद की एक किरण। हर ग़ज़ल मेरे किसी लम्हे से जुड़ी है। कुछ लम्हे बहुत अपने से हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो बस आते-जाते अजनबियों से छू लिए। कहीं मुहब्बत की मासूमियत है, कहीं जुदाई की टीस, कहीं हक़ीक़त का खुरदरापन, कहीं सच्चाई की खोज की कोशिश और कहीं ज़िंदगी से पूछे गए कुछ अनसुलझे सवालात हैं। इस संग्रह में शामिल ग़ज़लों में न तो कोई दावा है पूरी समझ का, न ही कोई प्रदर्शन किसी फ़न का। ये बस वो लफ़्ज़ हैं जो महसूस हुए और फिर खुद-ब-खुद क़ाग़ज़ पर उतरते गए। हर शे’र एक अहसास है, हर मतला एक शुरुआत और हर मक़्ता एक बंद दरवाज़े पर दस्तक है। मैंने कभी ये सोचकर नहीं लिखा कि इसे कोई पढ़ेगा या सराहेगा। बस लिखा क्योंकि न लिखता तो शायद घुट जाता। अब जब ये सब एक क़िताब की शक़्ल में सामने आ रहा है, तो एक अजीब सी झिझक भी है और सुकून भी। अगर मेरी कोई बात आपके दिल को छू जाए, तो समझूँगा कि मेरे अल्फ़ाज़ ने अपना मुक़ाम हासिल कर लिया। शुक्रिया उन सभी लम्हात का, जो इन ग़ज़लों की वजह बने…और शुक्रिया आपका कि आप इन्हें पढ़ रहे हैं। - महेश कुमार कुलदीप
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Book Title
और वो भी तुम (ग़ज़ल संग्रह)
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Author
महेश कुमार कुलदीप
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Language
Hindi
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