वसंत पंचमी

Posted By: Abhishek Sharma

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वसंत उत्सव


देखो–देखो, मौसम ने करवट बदली,

सुहावनी-सी रुत है छाई।

चैत्र-मधु-मास का हो रहा आगमन,

आनंद का समागम लाया है यह ऋतु भाई।


प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़ेगी,

पुष्प-संग प्रीत रचाएगी।

सरसों खेतों में लहर-लहर नाचेगी,

धरती मुस्कान सजाएगी।


पुष्पों पर भँवरे मधुमक बनकर,

मधु-रस का पान करेंगे।

बाग-बगीचे सुगंधित होंगे,

कली-कली में प्राण भरेंगे।


भाँति-भाँति के फूलों की खुशबू,

दिशा-दिशा में फैल जाएगी।

माँ सरस्वती विद्या और ज्ञान की देवी,

आज पूजन को पधारेंगी।


बसंत पंचमी का पावन पर्व,

मधुमास में छाया है।

पतझड़ ने ली शनैः-शनैः विदाई,

नव प्राणों का संदेश लाया है।


प्रेयस और प्रेयसी के मिलन की बेला,

प्रेम-सूत्र में बँधने का अवसर आया।

बसंत पंचमी पर नवजीवन का,

युगल करेंगे शुभ आरंभ नया।


सबके मन में हो खुशियों का समागम,

हर हृदय में उल्लास छाया रहे।

बसंत की यह मधुर बेला,

जीवन भर मुस्कान लाया करे।

- रचना बढ़िया



जग को सुविचार दे---

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‎हे! माता शारदे, 

‎दुनिया को तार दे, 

‎साजिशों की दौर में, 

‎जग को सुविचार दे|

‎कारखानों की होड़ में, 

‎पेड़ सारे कट रहे|

‎आम्र कुंज दिखते नहीं, 

‎पंछी भटक रहे||

‎इस त्रासदी से बचाने, 

‎हे! माँ कुछ नवाचार दे---

‎अब सुनने को मिलते नहीं, 

‎ढोलक,मृदंग,शहनाई|

‎डीजे की बेसुरे धुन, 

‎फूहड़,वासना है लाई||

‎हृदय को छूने वाली, 

‎कोई मधुर झंकार दे---

‎रिश्तों के रंग सारे, 

‎स्वार्थ से बेरंग हुए|

‎शकुनि की चाल देख, 

‎धर्मराज दंग हुए||

‎मेरे रामायण की समर्पण, 

‎श्री गीता का सद्विचार दे---

‎यक्ष-यक्षिणी सा प्रेम, 

‎किस्सों में कहीं खो गए|

‎लिव इन रिलेशन मानों, 

‎आजकल फैसन हो गए||

‎ इस युवा पीढ़ी को माँ, 

‎कुछ सभ्यता संस्कार दे---

‎रचनाकार:-श्रवण कुमार साहू, "प्रखर"

‎शिक्षक/साहित्यकार,/मानस व्याख्याकार

‎श्री तुलसी के राम मानस परिवार,राजिम

‎ 

‎🪷बसंत पंचमी की हार्दिक बधाई हो----

‎ माँ शारदे की कृपा आपके ऊपर सदा बनी रहे----